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Saturday, December 11, 2010

पश्चकथन/कृतज्ञता ज्ञापन




मई’ 2006 में मुखर्जी आयोग की रपट सार्वजनिक होने के बाद बँगला अखबार वर्तमानमें श्री पवित्र कुमार घोष ने 1 जून से 7 जुलाई तक इस रपट पर धारावाहिक रुप से 27 लेख लिखे थे, जिन्हें पढ़कर न केवल मुझे जानकारियाँ मिली थीं, बल्कि मेरे मन में इस विषय के प्रति रुची जागी थी। मैं श्री घोष के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।
बाद के दिनों में इण्टरनेट से जुड़ने के बाद मैंने पाया कि वहाँ अँग्रेजी में नेताजी से जुड़ी सामग्रियों का विपुल भण्डार है। वहाँ से जरुरत के अनुसार मैंने सामग्रियाँ एकत्रित की। जिन वेबसाइटों से सामग्रियाँ ली गयी हैं, उनके लिंककी सूची परिशिष्ट- ‘क’ में प्रस्तुत की जा रही है। कुछ लिंक को भूलवश कॉपी नहीं किया जा सका- ऐसे में सिर्फ क्षमायाचना ही की जा सकती है।
इन वेबपेजों के रचनाकारों के प्रति मैं हृदय से कृतज्ञता प्रकट करता हूँ।
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व्यक्तिगत रुप से मैं श्री अजमेर सिंह रन्धावा और डॉ. सुरेश पाध्ये जी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना चाहूँगा, जिन्होंने (क्रमशः फोन एवं इमेल के माध्यम से) मुझे स्वामी शारदानन्द जी के सम्बन्ध में जानकारियाँ उपलब्ध करायीं।
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मैं अपने पिताजी के प्रति कृतज्ञ हूँ, जिनके संग्रह से मुझे नेताजी की दो दुर्लभ तस्वीरें मिलीं- पहली, जर्मन पनडुब्बी पर सवार नेताजी की, जिसका उपयोग इस दूसरे संस्करण के मुखपृष्ठ पर (और अध्याय- 2.6 में भी) हुआ है; तथा दूसरी, अफगानी पठान की वेशभूषा में नेताजी की तस्वीर, जिसका उपयोग अध्याय 1.7 में हुआ है।
पहली तस्वीर (जर्मन पनडुब्बी वाली) की कॉपीराइट श्री शिशिर कुमार बोस के नाम है, जैसा कि तस्वीर के नीचे बँगला में लिखा है; और दूसरी तस्वीर (अफगानी पठान वाली) के चित्रकार श्री एल. ए. जोशी हैं- जैसा कि हस्ताक्षरसे पता चलता है। इस तस्वीर में जियाउद्दीन की दाढ़ी नहीं दिखायी गयी थी- मैंने शृँगारसॉफ्टवेयर की मदद से दाढ़ी बनायी।
बता दूँ कि इण्टरनेट खंगालते वक्त ऐसी तस्वीरें मेरी नजर से नहीं गुजरी, अतः मैं इन्हें दुर्लभ तस्वीरें मानता हूँ।   
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पहले (संस्करण) की तरह मैं श्री शिवम मिश्रा जी के प्रति आभार प्रकट करता हूँ, जिन्होंने इस रचना को पुस्तक के रुप में प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया था।
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श्री अरूण चन्द्र राय जी ने इस पुस्तक के पहले संस्करण को न केवल प्रकाशित किया था, बल्कि फरवरी’ 2012 के विश्व पुस्तक मेले में हंसके कार्यकारी सम्पादक श्री संजीव जी के हाथों इसका विमोचन भी करवाया था। उनके प्रति मैं आभार प्रकट करता हूँ।
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वर्तमान में यह दूसरा संस्करण मुद्रणिक, बंगलोर की संस्था पोथी“ (Pothi.Com) की ओर से प्रिण्ट ऑन डिमाण्डके तहत प्रकाशित है, अतः पोथीपरिवार के प्रति आभार।
इति, जय हिन्द!

23 जनवरी 2014                                                                             -जयदीप शेखर
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पुनश्चः
                
नाज़-ए-हिन्द सुभाषका आभासी-पुस्तक (eBook) संस्करण यूँ तो Pothi.Comपर भी उपलब्ध है, मगर वह A-4 साईज में है। फिलहाल मैं पुस्तक के आकार (8.5 गुणा 5.5 ईंच) में eBook संस्करण अपनी ही वेबसाइट JagPrabha.In पर प्रस्तुत कर रहा हूँ। इसमें दो-एक बातें जोड़ी भी गयी हैं।

18 अगस्त 2015                                                                              -जयदीप शेखर 
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परिशिष्ट- ‘क’


कुछ लिंक की सूची, जहाँ से इस रचना के लिए तथ्यादि लिये गये हैं:
http://in.answers.yahoo.com/question/indeÛ\qid¾20070702090557AAcH1Pb
http://hi&in.facebook.com/topic.php\uid¾6189349738&topic¾3983
http://books.e&pao.net/Heritage_Manipur/epShowChapter.asp\src¾ina/historyrole

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परिशिष्ट-


मेरे सुभाष

मेरे आदर्श,
हम शर्मिन्दा हैं कि आज भी हमारे हाथों में
सत्ता-हस्तान्तरणकी शर्तों की हथकड़ियाँ पड़ी हैं।

मेरे नायक,
हम शर्मिन्दा हैं कि आज भी हमारे पैरों में
”1935 के अधिनियमकी बेड़ियाँ पड़ी हैं।

मेरे देवता,
हम शर्मिन्दा हैं कि आज भी हमारे गले में
राष्ट्रमण्डल की सदस्यताका पट्टा पड़ा है।

मेरे साहसी,
हम आज दुनिया में
सर उठाकर, सीना तानकर नहीं चल सकते,
क्योंकि विश्व राजनीति में भारत को आज
एक दब्बू, पिछलग्गू, पिलपिले राष्ट्र का दर्जा हासिल है।

मेरे चरित्रवान,
तुम्हारे अन्तर्धान के बाद आज इस देश में
तीसरी पीढ़ी युवा हो चुकी है,
मगर अफसोस कि हम आज भी अपने अन्दर सोये
भारतीयता के अहसासको जगा नहीं पाये हैं।

हम आज तुमसे
आँखें मिलाने के काबिल नहीं हैं
मेरे देशभक्त,
हम माफी के काबिल भी नहीं हैं।

फिर भी, हो सके तो
हमें माफ कर देना-
मेरे सुभाष!

-जयदीप शेखर (23 जनवरी’2014)
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3 comments:

  1. जयदीप भाई ,
    जय हिंद !

    इन बेहद जरूरी लिंक्स के लिए आप का बहुत बहुत आभार ! अब शायद आप के आलेखों को ले कर उठ रहे सवालो को विराम लग जायेगा !

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  2. बहुत अच्छा लगा इन लिंक्स के बारे में जानकर...

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  3. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है - देखें - 'मूर्ख' को भारत सरकार सम्मानित करेगी - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

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